Saturday, April 18, 2026

तुम्हे मौत मुबारक हो, अब दुबारा इस दुनिया में कदम मत रखना” आखिर क्यों मीना की मौत पर नरगिस ने कह दी थी इतनी बड़ी बात

बॉलीवुड में अभिनेत्री मीना कुमारी को कौन नहीं जानता. गरीब परिवार से निकलकर आगे बढ़कर बॉलीवुड में अपना नाम कमाने वालीं मीना कुमारी को ट्रेजेडी क्वीन भी कहा जाता था. न सिर्फ उनकी प्रोफ़ेशनल ज़िन्दगी ट्रेजेडी से भरी थी बल्कि निजी ज़िन्दगी में भी उतार चढ़ाव हर कदम पर मिले थे. यहाँ तक की उनकी मौत को लोगो ने उनके लिए इनाम कहा था. अभिनेत्री की मौत से लोग दुखी काम खुश ज़्यादा थे. सुनकर यह सब भले से थोड़ा अटपटा लगे लेकिन जैसे जैसे आप अभिनेत्री मीना कुमारी के बारे में जानेंगे वैसे वैसे अब असलियत से वाकिफ हो जायेंगे. आइये जानते है मीना कुमारी की ज़िंदगी से जुडी कुछ अनकही अनसुनी बातें.

गरीबी से निकलकर बनाया था अपना नाम

मीना कुमारी के पिता अली बक्श एक थिएटर आर्टिस्ट थे. मीना कुमारी इतने गरीब परिवार से थीं की उनके पिता के पास उनके जन्म होने पर डॉक्टर को देने के लिए फीस के पैसे तक नहीं थे. अली बक्श ने एक क्रिस्चियन महिला से शादी की थी. शादी के बाद अली बक्श बेटा चाहते थे, लेकिन लड़की पैदा होने पर उन्होंने फैसला कर लिया था वे लड़की को अनाथ आश्रम में दे आएंगे, लेकिन दो पल बाद ही उन्होंने अपना फैसला बदल लिया और वापस घर ले आये. कोई नहीं जनता था की जिस बेटी को वे अनाथ आश्रम में देने जा रहे थे वही लड़की एक दिन बॉलीवुड पर राज करेगी.

6 साल की महज़बीं ने संभाला था घर

मात्र 4 साल की उम्र में मीना कुमारी ने फिल्म स्टूडियो से रिश्ता जोड़ लिया था. घर की आर्थिक स्थिति को कन्धा देने के लिए अली बक्श मीना को 4 साल की उम्र से ही फिल्म स्टूडियो ले जाने लगे थे. जहाँ महज़बीं के चेहरे को देखकर निर्देशक विजय भट्ट ने उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट कर लिया था. मीना की पहली फिल्म लेदरफोस थी. जिसके लिए उन्हें 25 रस बतौर फीस मिले थे.


बस फिर क्या था 4 साल की उम्र में शुरू हुआ उनका करियर उनकी मौत पर ही जाकर थमा. अपने पूरे करियर में उन्होंने बॉलीवुड को साहिब बीबी और गुलाम, पाकीजा, मेरे अपने, बैजू बावरा, दिल अपना प्रीत पराई जैसी न जाने कितनी हिट फिल्मे दी. अपने करियर में मीना कुमारी ने काजल, साहिब बीबी और गुलाम, परिणीता और बैजू बावरा फिल्मफेयर अपने नाम भी किया.

1952 में की थी गुप चुप शादी

मीना कुमारी शादीशुदा ज़िंदगी कलह से भरी थी. पहली बार कमाल अमरोही ने मीना कुमारी को जब वे 4 साल की थीं. लेकिन जब दोबारा 14 साल बाद निर्देशक अशोक कुमार ने मीना का परिचय दोबारा कमाल से करवाया बस तभी से दोनों की कहानी शुरू हुई थी. तब मीना कुमारी को फिल्म अनारकली के लिए ऑफर आया था. कुछ समय बाद ही मीना के एक्सीडेंट हो गया था, जिसके बाद दोनों एक दुसरे खत लिखा करते थे. ये मोहोब्बत का सिलसिला लगभग 4 साल तक चला, इसके बाद दोनों ने एक दूसरे से शादी कर ली थी. दोनों ने 14 फरवरी 1952 को दुनिया छुप कर शादी कर ली थी.

शादी के बाद बदल गयी थी दुनिया

भले से शादी से पहले दोनों में बेशुमार मोहोब्बत रही हो यौर कमाल को मीना का फिल्मो में काम करने से ऐतराज़ भी न हो लेकिन इन सबके बावजूद मीना पर शादी के बाद पाबंदियां लगनी शुरू होगयीं थी. जानकारी के अनुसार कमाल ने शूटिंग के दौरान उनके कमरे में सिर्फ मेकअप बॉय को घुसने के छूट दी थी, और समय से आना और खुद की कार से वापस होने की पाबन्दी लगा दी थी. एक अभिनेत्री के लिए इन सब के दायरे में रह कर काम करना आसान नहीं था. दोनों में समय समय पर कलेश हुए करते थे और कई बार तो कमाल मीना पर हाथ भी उठा दिया करते थे. दोनों के बीच पद रही दरार और मीना के दुःख की चश्मदीद तो नरगिस भी रहीं है.

शादी के बाद शुरू हो गई थी मार पीट

दोनों में शादी के बाद मार पीट भी शुरू होगई थी, जिसके बारे माँ नरगिस को साफ तौर पर पता था. जानकारी के अनुसार फिल्म ‘मई चुप रहूंगी’ के दौरान दोनों नरगिस और मीना ने कमरा शेयर किया था उसी समय उन्होंने कमाल और मीना के बीच हुई अनबन के बारे में पता चला जब अगले दिन वे मीना से मिलीं तो उनकी आँखे सूजी हुइ थी. मीना अपनी ज़िन्दगी से इतनी परेशान थी फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें रोने के लिए ग्लिसरीन की जरूरत नहीं पड़ती थी.

नरगिस को बाजी कहा करतीं थी मीना

एक साक्षात्कार के दौरान नरगीस ने मीना की बारे में बताया की “एक रात मैंने मीना को बगीचे में हांफते हुए देखा. मैंने उनसे कहा कि आप आराम क्यों नहीं करतीं, जिसपर उन्होंने जवाब दिया, “बाजी आराम मेरी किस्मत में नहीं है. मैं केवल एक बार ही आराम करुँगी.” उस रात उनके कमरे से हिंसा की भी आवाजें आई थीं. अगले दिन मैंने देखा कि मीना की आंखें सूजी हुई थीं.”


नरगिस ने मीना कुमारी के दर्द को बयान करते हुए एक लेख भी लिखा था जिसमे उन्होंने कहा था की “कुछ समय बाद मुझे सुनने को मिला कि मीना, कमाल साहब के घर से चली गई हैं. बकर के साथ उनकी काफी लड़ाई हुई थी, जिसके बाद वह वापस आई ही नहीं. शराब की लत ने मीना के फेफड़े खराब कर दिये थे. जब मैं उनसे नर्सिंग होम में मिलने गई तो उन्होंने कहा, “मेरे सब्र की भी सीमा है बाजी, कमाल साहब के सचिव ने मेरे ऊपर हाथ कैसे उठाया. जब मैंने शिकायत की तो उन्होंने कुछ भी नहीं किया. मैंने तय कर लिया है कि मैं वापस नहीं जाउंगी.”

आखिर में नरगिस ने मीना कुमारी की मौत को उनका इनाम घोषित करते हुए कहा थे “तुम्हे मौत मुबारक हो, अब दोबारा इस दुनिया में कदम मत रखना”

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