Sunday, April 19, 2026

गरीबी को हराने के लिए महिला ने थामी कैंची, ‘लेडी बार्बर’ बनकर कर रही परिवार की परवरिश

अक्सर आपने ब्यूटी पार्लर में महिलाओं को लोगों के बाल काटते और फेशियल करते देखा होगा। कई बार यूनीसेक्सुअल पार्लरों में महिलाएं पुरुषों के भी बाल काटती नज़र आती हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसी महिला के विषय में सुना है जो घर-घर जाकर पुरुषों के बाल काटती है?

यूं तो ये बात सुनने में काफी अजीब लगती है लेकिन बिहार के सीतामढ़ी जिले में एक महिला रहती है जो इस तरह का कार्य करती है।

आज हम आपको एक ऐसी महिला के विषय में बताने जा रहे हैं जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए गली-गली घूमकर नाई का कार्य करती है।

sukhchain devi

लेडी बार्बर के नाम से हैं फेमस

बता दें, बिहार के सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी प्रखंड के बसौल गांव की निवासी सुखचैन देवी आज पूरे देश में लेडी बार्बर के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी हैं। हर किसी की जुबान पर उनका नाम है। सोशल मीडिया पर सुखचैन देवी की तारीफ में लोग कसीदे पढ़ रहे हैं। इसकी वजह है उनके द्वारा किया जा रहा काम।

आपने अक्सर देखा होगा छोटे क्षेत्रों में महिलाओं को चूल्हे-चौके तक सीमित रखा जाता है। उनके बाहर जाकर काम करने पर पाबंदी होती है। लेकिन सुखचैन देवी ने समाज के इस नियम को तार-तार करते हुए साबित कर दिया है कि अगर एक महिला चाहे तो वो सबकुछ कर सकती है जो पुरुष कर सकते हैं।

पिता को देखकर सीखा बाल काटना

मालूम हो, सुखचैन देवी का जन्म एक नाई के परिवार में हुआ था। उनके पिता पेशे से नाई थे और लोगों की हजामत किया करते थे। जब सुखचैन देवी छोटी थीं उस वक्त उनके पिता उन्हें साथ ले जाया करते थे। उन्हें देखकर ही बेटी यह सब काम सीख गई थी।

sukhchain devi

लॉकडाउन में शुरु किया था हजामत का कार्य

लेकिन उन्होंने कही ये नहीं सोंचा था कि उन्हें यह काम कभी करना पड़ेगा। बहरहाल, आज से 16 साल पहले सुखचैन देवी की शादी पददौरा गांव में हुई थी। शादी के बाद उनके पति की तबियत काफी खराब रहती थी जिसकी वजह से उसकी जल्दी ही मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों की सहमित से उनकी शादी उनके देवर रमेश से कर दी गई थी। हालांकि, शादी के बाद उनके पास रहने के लिए ससुराल में जगह नहीं थी इसलिए वे अपने तीन बच्चों के साथ अपने मायके आ गईं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान सुखचैन देवी के पति रमेश की नौकरी चली गई थी जिसके बाद उनपर आर्थिक संकट छा गया था। ऐसे में सुखचैन देवी ने अपने परिवार की परवरिश के लिए अपने पुश्तैनी कार्य का सहारा लिया। उन्होंने घर-घर जाकर मर्दों की हजामत करने का काम शुरु किया।

sukhchain devi

200-300 रुपये कमाती हैं

शुरुआत में सुखचैन देवी को दिक्कत होती थी। पुरुषों को भी उनसे बाल बनवाने में थोड़ी शर्म लगती थी। लेकिन बाद में लोगों ने भी उनकी मेहनत की कद्र करते हुए उनसे हजमात करवाना शुरु किया।

धीरे-धीरे पूरे इलाके में वे लेडी बार्बर के नाम से प्रसिद्ध हो गईं। वे दिनभर में 200-300 रुपये कमा लेती हैं जिससे उन्हें परिवार चलाने में खासी मदद मिलती है।

ब्यूटी पार्लर का लेंगी प्रशिक्षण

गौरतलब है, सुखचैन देवी के जज्बे और हिम्मत से खुश होकर जिले की महिला कलेक्टर अभिलाषा कुमारी शर्मा ने उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ और बेहतरीन ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण दिलाने का आश्वासन दिया है।

 

 

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