कहते हैं किन्नर जिसपर हाथ रख देते हैं उसका घर हमेशा खुशियों से भरा रहता है। उस घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं रहती है। आज हम आपको किन्नरों की दरियादिली से जुड़े एक ऐसे मामले के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें इन्होंने मानवता की मिसाल कायम की है।

बधाई गाने पहुंची किन्नरों को मिला अशुभ समाचार
इस मामले की शुरुआत साल 2017 में बीकानेर की कुम्हार बस्ती से हुई थी। किन्नरों की गुरु रजनी बाई को पता चला था कि एक कुम्हार के घर पुत्र का जन्म हुआ था। बस फिर क्या था रजनी बाई अपनी टोली के साथ उस घर में पहुंच गईं। लेकिन यहां पहुंचकर उन्होंने जो देखा उसे देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं थीं। किन्नरों को पता चला कि जिस घर में नवजात शिशु का जन्म हुआ था उसके पिता की उसी दिन मौत हो गई थी। हैरानी की बात ये कि वह अपने पीछे एक विधवा पत्नी, 7 बेटियां और 1 नवजात बच्चा छोड़ गया था।
किन्नरों ने दिया महिला को सहारा
महिला का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। वह बच्चों की परवरिश की चिंता में डूबी जा रही थी। यह सब देखकर रजनीबाई का दिल पसीज गया और उन्होंने विधवा को सहारा देते हुए वादा किया कि उनकी दो बेटियों की शादी वे खुद कराएंगी। इसका सारा खर्च किन्नर समाज खुद उठाएगा।
धीरे-धीरे इस वादे को पांच साल बीत गए। इस बीच रजनीबाई भी चल बसीं। लेकिन उनकी शिष्या और किन्नर समाज की अध्यक्ष मुस्कान बाई अग्रवाल को अपने गुरु के द्वारा किया गया वो वादा याद रहा।

किन्नरों ने कराई बेटियों की शादी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते दिन मुस्कान बाई अपनी टोली के साथ कुम्हारों के मोहल्ले में एक बार फिर पहुंच गईं। यहां पहुंचकर उन्होंने उस महिला से मुलाकात करी जिसकी बेटियों की शादी का वादा उनकी गुरु रजनीबाई ने मरने से पहले किया था।
किन्नरों ने न सिर्फ दोनों लड़कियों की शादी तय करवाई बल्कि खाने-पीने से लेकर टीवी, फ्रिज, कूलर, ऐसी आदि सब सामान भी गिफ्ट किया। इसके अलावा किन्नरों ने एक ही मंडप में दोनों लड़कियों की शादी भी करवाई और उन्हें जिंदगीभर खुश रहने का आशीर्वाद भी दिया।
पहले भी कर चुके हैं मदद
गौरतलब है, किन्नर समाज की अध्यक्ष मुस्कान बाई अग्रवाल के नेतृत्व में अबतक बीकानेर की सात जरुरतमंद लड़कियों की शादी करवाई जा चुकी है। इससे पहले कोरोनाकाल में किन्नर समाज की तरफ से गरीबों को राशन की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई थी।