Thursday, April 16, 2026

15 साल की उम्र में बनीं 3 बच्चों की माँ, झाड़ू पोछा करते-करते बनी मशहूर लेखिका

इस दुनिया में संघर्ष करने वाले और हमेशा आगे बढ़ने की चाहत रखने वाले लोगों के सपने कभी अधूरे नहीं रहते। मुश्किल हालातों से लड़कर जिसने जीना सीखा है उसे ही दुनिया सलाम करती है. ऐसी ही एक कहानी हमारे सामने है. एक औरत जिसकी शादी 14 वर्ष बड़े पुरुष से हुई, पति ने खूब पीटा लेकिन हार नहीं मानी। लोगों के घरों में झाड़ू पोछा लगाते हुए एक दिन एक किताब लिख डाली। किताब ने पूरी दुनिया में यह दिलवाया और आजकल बड़े-बड़े बुक इवेंट्स में उसे बुलाया जाता है.

12 साल की उम्र में शादी-

ये कहानी है बेबी हलदर की जिसकी शादी महज 12 साल की उम्र में हो गई वो भी उसकी उम्र से 14 वर्ष बड़े पुरुष के साथ. पति का काम केवल शराब पीकर बेबी हलदर को पीटना था. आइए थोड़ा पीछे चलते हैं और जानते हैं कि पति के जुल्मों का शिकार होने वाली बेबी हलदर का बचपन कैसा था.

बेबी हलदर का जन्म साल 1973 में कश्मीर में हुआ. बेबी हलदर महज 4 साल की उम्र की थीं जब उनकी माँ का निधन हो गया. शराबी पिता के साथ बेबी हलदर मुर्शिदाबाद चली आईं और इसके बाद दुर्गापुर में आकर रहने लगीं। यहाँ आकर बेबी के पिता ने दूसरी शादी कर ली. बेबी का आगे पढ़ने का मन था लेकिन ऐसा नहीं करने दिया गया. 12 साल की उम्र होते ही बेबी को ब्याह दिया गया एक ऐसे व्यक्ति से जिसकी उम्र बेबी से 14 वर्ष अधिक थी. बेबी ने हमेशा से ही अभावों में बचपन बिताया था.

शादी के बाद वो ख़ुशी इसलिए हुईं कि कम से कम भरपेट भोजन तो मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. शादी के कुछ दिन बाद बेबी के पति ने उसके साथ जबरदस्ती की । 15 वर्ष की उम्र तक बेबी तीन बच्चों की बन गई. एक दिन पति ने किसी और पुरुष के साथ बात करते हुए देख लिया तो बेबी के सिर में पत्थर मारकर उसे लहूलुहान कर दिया।
जब बातें बर्दाश्त से बाहर होने लगीं तब साल 1999 में एक अनजान ट्रेन से शौचालय में बैठकर बेबी दिल्ली आ गईं और वहां से गुड़गांव।

एक प्रोफेसर के यहाँ काम मांगने पहुंची-

किस्मत ने पलटी मारी और बेबी ने खटखटाया एक प्रोफेसर के घर का दरवाजा। ये प्रोफ़ेसर हिंदी साहित्य के सिरमौर मुंशी प्रेमचंद के पोते प्रबोध कुमार थे और बेबी इनके घर काम मांगने गई थीं. बेबी को काम मिल गया और साथ में मिली जिंदगी जीने की दिशा। वहां पर रखी हुई किताबों को देखकर बेबी के मन से एक अलग ही आवाज आ रही थी.

अपने बारे में लिखो, बस लिखती जाओ-

प्रबोध कुमार बेबी के मन में किताबों के प्रति पल प्रेम को समझ गए और उन्होंने बेबी को किताब लिखने की प्रेरणा दी. प्रबोध ने कहा की अपने बारे में लिखो और बस लिखती जाओ गलत हुआ तो कोई बात नहीं। बेबी ने लिखना शुरू किया अपने जीवन की सारी कहने इस किताब में लिखकर प्रबोध कुमार के सामने रख दी. किताब बांग्ला में थी जिसका हिंदी अनुवाद प्रबोध कुमार ने करवाया। इसका नाम था आलो आंधारि।

किताब बाजार में लगातार बिकने लगी और धीरे धीरे यह लोगों के मन में जगह बना चुकी थी. इसके बाद उर्वशी बुटालि नामक लेखिका ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया और इसे नाम दिया ‘अ लाइफ लेस्स ऑर्डिनरी’. किताब और अधिक लोगों तक पहुंची और दुनिया की कई भाषाओं में इसका अनुवाद किया गया. और देखते ही देखते एक नौकरानी बन गई दुनिया की सबसे मशहूर लेखिका।

आज भी करती हैं झाड़ू पोछा-

बेबी आज तक चार किताबें लिख चुकी हैं और दुनियाभर में उनका नाम हो रहा है फिर भी बेबी ने प्रबोध के घर में झाड़ू पोछा करना नहीं छोड़ा। आज भी वो प्रबोध के घर के काम खुद करती हैं. हालाँकि रॉयल्टी से मिलने वाले पैसों की वजह से वो झोपड़ी से घर तक आ गई हैं लेकिन उनका स्वभाव आज भी नहीं बदला। बेबी आज कई जगह पर साहित्यिक महोत्सवों में बुलाई जाती हैं और लोग उनका सम्मान करते हैं.

आज बेबी संघर्ष से सफलता का जीता जागता उदाहरण हैं. बेबी ने दुनिया के उन लोगों को एक सीख दी है जो मुश्किल हालातों को देखते हुए कदम पीछे खींच लेते हैं या फिर अपने सपनों को खत्म कर देते हैं.

Ambresh Dwivedi
Ambresh Dwivedi
Writer, news personality
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