आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को फांसी देने की खबरे चर्चा में है । महिला का नाम शबनम है जिसे 2008 में बावन खेड़ी हत्याकांड में फाँसी की सजा सुनाई जा चुकी है। शबनम की माफी की अर्जी राष्ट्रपति के यहाँ भी कैंसिल हो चुकी है।
अब शबनम के इकलौते बेटे ताज ने प्रधानमंत्री मोदी जी और राष्ट्रपति से अपनी मां की फांसी रोकने की मार्मिक अपील की है । शबनम का बेटा अपनी मां के गुनाहों को माफ करने की गुहार लगा रहा है ।

शबनम का बेटा कई बार जेल में अपनी माँ से मिलकर आ चुका है । 6 वर्ष तक उसके साथ जेल में पला है। जिसके बाद प्रशासन द्वारा उसके अच्छे भविष्य के लिए उसकी कस्टडी बुलंदशहर के एक परिवार को दे दी। जहां उसकी परवरिश हो रही है ।
शबनम के बेटे का कहना है कि उसकी मां उसे बहुत प्यार करती है । गले से भी लगाती है। बताते हुए ताज रो पड़ता है । वह चाहता है कि सरकार उसकी मां की फांसी रोक दे जिससे उसके सर से मां का साया न उठे।
“पढ़-लिख कर बनना अच्छा इंसान”
शबनम का बेटा जब उससे जेल में मिलने गया था तो शबनम ने रोते हुए उसे समझाया था कि वो पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बने । शबनम ने कहा था कि वो एक अच्छी मां नही है लेकिन तुम एक अच्छे इंसान बनना ।
बुलंदशहर में रहकर पढ़ाई कर रहा है इकलौता बेटा
6 साल का होने के बाद अमरोहा प्रशासन ने ताज की कस्टडी बुलंदशहर के एक परिवार को दे दी। ताकि अच्छे माहौल में रहकर बच्चा पढ़ाई कर सके । उस्मान सैफी की कस्टडी में बच्चा एक अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रहा है।
निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक फांसी की सजा
शबनम को निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। राष्ट्रपति ने भी शबनम की माफी की अपील को ठुकरा दिया है । शबनम ने 15 अप्रैल 2008 को अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिवार के 7 सदस्यों की हत्या कर दी थी । मरने वालो में एक 10 महीने का बच्चा भी था ।

शबनम ने इस जघन्य हत्याकांड को प्रेमी से शादी करने के लिए अंजाम दिया था। उस वक्त शबनम की उम्र 25 वर्ष थी ।
नये परिवार के साथ घुलमिल चुका है बच्चा
शबनम का बेटा ताज अपने नए परिवार के साथ घुलमिल चुका है । कस्टोडियन उस्मान सैफी और उनकी पत्नी वंदना सिंह ताज को मां बाप का प्यार दे रहे है। बच्चे को मां का प्यार देने वाली वंदना सिंह खुद एक शिक्षिका है। वो बच्चे को होने वाली परेशानियों से वाकिफ है ।
शबनम के पास है काफी प्रॉपर्टी
शबनम के नाम पर काफी जमीन जायदाद और प्रोपर्टी है । उस्मान सैफी के अनुसार बच्चे की शिक्षा की व्यवस्था अच्छी हो चुकी है इसलिए उन्होंने शबनम से अपनी प्रोपर्टी को किसी अच्छे काम के लिए दान कर देने की अपील भी की है। वे चाहते है कि शबनम अपनी प्रॉपर्टी किसी अस्पताल या स्कूल के लिये दान कर दे ।
चल रही है फांसी की तैयारी
देश के इकलौते महिला फांसीघर में शबनम को फांसी देने की तैयारी जोर शोर से चल रही है। निर्भया के हत्यारों को फांसी देने वाला पवन जल्लाद भी 2 बार जेल का दौरा कर चुका है । जेल प्रशासन ने शबनम के वजन के बराबर पत्थर को फंदे से लटकाने की रिहर्सल भी शुरू की है । हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि उन्हें अभी तक डेथ वारंट नही मिला है ।