Saturday, April 11, 2026

मदद के इंतज़ार में बैठा मूक-बधिर बेटा खुद ही मां का पार्थिव शरीर ले जाने को हुआ मजबूर

आए दिन सोशल मीडिया पर तमाम ऐसी खबरें, ऐसी तस्वीरों से हमारा सामना होता है जो हमारा दिल झकझोर कर रख देती हैं। हम उन्हें देखते हैं..उनपर विचार करते हैं, दुख प्रकट करते हैं…बाद में यह कहकर अपना ध्यान उस चीज़ से हटा लेते हैं कि आखिर कर ही क्या सकते हैं? शायद हम यह बात भूल जाते हैं कि शुरुआत एक से ही होती है…..काफिला बाद में बनता है।

निर्ममता की पराकाष्ठा बनी यह घटना

बहरहाल, आज हम आपको समाज की उस सच्चाई से रुबरु करवाने जा रहे हैं जिसे जानने के बाद आपको एक बात अंदर ही अंदर जरुर कचोटेगी कि आखिर क्यों हम इस समाज को बदल नहीं सकते, आखिर क्यों यहां के लोग इतने निर्मम होते जा रहे हैं।

बेबस मूक-बधिर बेटा

दरअसल, हम बात कर रहे हैं इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना की जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया। मामला गुजरात के अंक्लेश्वर का है जहां एक बेटा अपनी मां का पार्थिव देह लेकर भरुच के क्रियाकर्म स्थल की ओर जा रहा था। इस बेटे की बेबसी का कारण यह था कि वह मूक और बधिर था। इस वजह से वह अपनी बात लोगों को बताने में असमर्थ था।

भीख मांगकर करते थे गुज़ारा

जानकारी के मुताबिक, एशिया की सबसे बड़ी औद्योगिक इकाई अंक्लेश्वर में लाखों की संख्या में भिखारी रहते हैं। ये लोग दिनरात भीख मांग कर दो पहार का भोजन कर पाते हैं। ऐसे ही दो मां-बेटे अंक्लेश्वर की इन्हीं गलियों में भीख मांगकर अपना गुजर-बसर करते थे। हाल ही में मां की मौत हो गई जिसके बाद काफी देर तक उसका बेटा मदद के इंतज़ार में शव के पास बैठा रहा लेकिन कोई भी उसकी सहायता के लिए आगे नहीं आया।

लाचार की किसी ने नहीं की मदद

अपनी अपंगता और समाज की बेशर्मी से हारे बेटे ने स्वयं ही मां का अंतिम संस्कार करने की ठीन ली। उसने पार्थिव शरीर को उस लारी पर रख दिया जिसपर बैठकर वह भीख मांगा करता था। कुछ ही देर में वह पार्थिव शरीर को लेकर श्मशान की ओर बढ़ गया। रास्ते में कई लोग उसे मिले जिन्होंने उससे उसकी समस्या को तो जानने की इच्छा जताई परंतु किसी ने भी उसकी मदद नहीं की।

सोशल मीडिया पर अपलोड हुई वीडियो

कई लोगों ने उस लाचार बेटे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने में होशियारी दिखाई लेकिन मजाल है कि कोई भी मदद के लिए आगे आया। देखते ही देखते इस घटना की खबर आग की तरह फैल गई जिसके बाद श्मशान संचालक धर्मेश सोलंकी ने क्रियाकर्म की सभी सामग्री मंगवाकर पूरे विधि विधान से उस पुत्र की मां का अंतिम संस्कार करवाया।

मानवता की कमी

इस घटना की खबर जैसे ही मीडिया चैनल्स और तमाम एजेंसीज़ को लगी सभी ने इसका बवंडर बनाया लेकिन किसी ने इस प्रश्न को नहीं उठाया कि आखिर क्यों हमारे देश में मानवता खत्म होती जा रही है। क्यों कोई किसी की मदद करने से पहले 10 बार सोंचता है।

खैर, पुलिस प्रशासन से लेकर आम जनमानस तक सबको शोक प्रकट करने का तो याद रहा लेकिन उस लाचार की सहायता के लिए किसी ने भी कदम नहीं बढ़ाया।

 

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