Friday, April 17, 2026

ऐसी खतरनाक जनजाति, दुश्मनों को मारकर उसका मांस खाना और खोपड़ी को कटोरी और तकिये के जैसे इस्तेमाल करना

इस दुनिया में आज भी बहुत सारी ऐसी सम्भयताएँ और जनजातियां हैं जो मॉडर्न चीजों से अनजान हैं और आज के समय से उनका कोई वास्ता नहीं है. अपने नियम, अपने कानून और यहाँ तक अपनी एक अलग जगह बनाकर रहने वाली जनजातियों में एक नाम है न्यू गिनी (New Guniea) की अस्मत जनजाति (Asmat Tribe). ये अपने दुश्मनों को मारकर उनका मांस खाते हैं और उसके बाद खोपड़ी कको कटोरी और तकिए जैसे इस्तेमाल करते हैं.

देते हैं मांस की दावत-
अस्मत जनजाति के लोग दुश्मन को मारकर उसका मांस पकाकर खा जाते हैं. इस दौरान वो अपने समुदाय के लोगों को दावत देते हैं और ऐसा करना शुभ माना जाता है. अपने आसपास के लोगों को दावत देने से उनकी वीरता और वफ़ादारी दिखती है. सिर को तंदूर में भूनकर खा जाते हैं. इसके बाद जो खोपड़ी होती है उससे ये लोग तकिया बना लेते हैं या फिर उसके दो भाग कर उसे कटोरी के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

दुश्मन का सिर बच्चों के पैरों पर-
यहाँ के लोग मांस को ल=पकाते समय अनुष्ठान इसलिए करते हैं क्योंकि ये इंसानों के मांस को पवित्र मानते हैं. इंसानों के मांस की तुलना वो पेड़ और फलों से करते हैं इसलिए पवित्र मानते हुए इसका अनुष्ठान करते हैं. इसके बाद दुश्मन के सिर को ये जनजाति अपने बच्चों के पैरों में रखती है. उनका ये मानना है की दुश्मन के सिर को इस तरह बच्चों के पैरों में रखने से दुश्मन की शांति बच्चे के अंदर आ जाती है.

हड्डियां ले आते हैं घर-
नदी के किनारे रहने वाले इस जनजाति के लोग दुश्मन का शिकार करने के बाद उसकी रीढ़ की हड्डी और खोपड़ी निकालकर घर ले जाते हैं. उसे ले जाकर अपने घरों में सजाते हैं. उनका मानना होता है की ऐसा करने से उनकी वीरता और शौर्य में इजाफा होता है और बाकी लोग उनसे डरते हैं. ये लोगों की हड्डियों को घर में सजाते हैं जैसे कोई विजय की ट्रॉफी हो.

मरने के बाद करते हैं शरीर की दुर्गति-
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है की अपने आसपास के किसी व्यक्ति के मरने पर ये लोग उसके शरीर की दुर्गति कर देते हैं. मरने के बाद उसकी आँख और बाकी अंग निकाल लिए जाते हैं. इनका मानना है की ऐसा करने से ये बुरी आत्मा अब किसी के अंदर प्रवेश नहीं कर पाएगी। सबसे बड़ी बात की हड्डियों से ये लोग गहने बनाते हैं और फिर वो एक पीढ़ी से दूसरी पीड़ित तक ट्रांसफर होते रहते हैं.

Ambresh Dwivedi
Ambresh Dwivedi
Writer, news personality
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