कंगणा रनौत जल्द आएंगी जयललिता के किरदार में नज़र
दक्षिण भारतीय लोगों की भावुकता ने कई फिल्मी हस्तियों को भगवान के बराबर ला कर बैठा दिया । लोग इन्हें मानते ही नहीं बल्कि पूजते हैं। पूजी जाने वाली इन हस्तियों में से एक नाम रहा है थलाइवी जयललिता का ।

जिस समय जयललिता अस्पताल में अपनी आखिरी सांसें ले रही थीं उस समय उसी अस्पताल के बाहर एक हजूम खड़ा था जो उनके लिए प्रार्थना कर रहा था। कुछ ने तो खुद को आग तक लगा ली। इसी घटना के कुछ समय पहले मेरा एक दोस्त मुझसे मिलने आया था । तब जयललिता के जेल जाने की खबर आई थी । अधिकांश भारतवासियों की तरह मैंने भी कहा था कि अच्छा हुआ जो जेल चली गई । 400 करोड़ का घोटाला मामूली बात नहीं, ऐसे नेताओं को जेल होनी ही चाहिए । इस पर मेरा दोस्त जो पिछले 4 साल से तमिलनाडु में था वो बोल पड़ा “अच्छा है तुम्हारी बात कोई तमिल व्यक्ति नहीं सुन रहा, सुन लेता तो बहुत कूटता तुमको ।”
मैंने कहा क्यों भाई क्या ? उन्हें नहीं पता कि जयललिता ने इतना बड़ा घोटाला किया है ? इस पर मेरे दोस्त ने जवाब दिया “जब पेट में आग लगी हो ना तब रोटी देने वाले हाथों को देखा जाता है उसकी शक्ल को नहीं । पेट की आग अच्छे बुरे का फर्क मिटा देती है । जयललिता ने हर गरीब की मदद की है वहां । इसीलिए लोग भगवान मानते हैं जयललिता को ।” पता नहीं जयललिता के बारे में आम लोगों की क्या राय है लेकिन तमिलनाडु के लिए वह वाकई में अम्मा थीं। उनके जाने पर ऐसा लगा जैसे तमिलनाडु अनाथ हो गया हो ।

जयललिता आज फिर से चर्चा में हैं। चर्चा का कारण है उनके जीवन पर आधारित फिल्म थलाइवी । कंगणा रनौत इस फिल्म में अम्मा यानी जयललिता का किरदार निभा रही हैं । पहले पर्दे पर और फिर राजनीतिक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाने वाली जयललिता की कहानी किसी भी फिल्म से बहुत ऊपर है । ग्लैमर से जननेत्री तक, भगवान बनने से घोटालों में फंसने तक हर तरह के क़िस्से जुड़े हैं उनके साथ । तो चलिए एक नज़र डालते हैं अम्मा के जीवन पर :
जयललिता नहीं बनना चाहती थीं अम्मा
जयललिता ने सिमी गरेवाल द्वारा होस्ट किए जाने वाले एक फेमस चैट शो में कहा था कि उनके जीवन के पहले एक तिहाई हिस्से पर उनकी मां का ज़ोर चला तथा दूसरे एक तिहाई पर उनके मेंटोर, गुरू, मार्गदर्शक, एमजीआर का । उन्होंने अपने तरीके से तो बहुत ही कम ज़िंदगी जी है । 140 फिल्में करने वाली जानीमानी अभिनेत्री ने एक चुनाव प्रचारक के नाते राजनीति का रुख किया लेकिन एक बार जो राजनीति में प्रवेश किया फिर जनता ने उन्हें पीछे मुड़ कर देखने का मौका ही नहीं दिया । जयललिता ने 8 बार विधानसभा का चुनाव लड़ा तथा एक बार राज्यसभा के लिए मनोनीत हुईं लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही चार बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद पर बैठना ।
जन्म व फिल्मी कैरियर
मैसूर ज़िले का हिस्सा रहे मांडया के मेलुरकोट गांव में 24 फरवरी 1948 को जन्मीं जयललिता ने महज 2 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया । फिल्मों में काम करने वाली उनकी मां ने मन ही मन सोच लिया था कि वह अपनी बेटी को हीरोइन ही बनाएंगी । लेकिन जयललिता ने कभी नहीं चाहा था कि वह हीरोइन या नेत्री बनें । वह पढ़ने में होशियार थीं, क्लास में टॉप करती थीं, उन्हें एक सफल वकील बनना था । मगर अपनी सोच से कहीं बड़ी होती है ये नियति । नियति तय कर चुकी थी कि जयललिता को क्या बनना है ।

मां के दबाव में जयललिता ने पहली कन्नड़ फ़िल्म की, जिसके बाद उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता अपने आप मिलने लगा । एक के बाद एक फिल्में करते हुए जयललिता ने शिवाजी गणेशन, जयशंकर, राज कुमार, एनटीआर यानी एन टी रामाराव और एम जी रामचंद्रन यानी एमजीआर जैसे सुपरस्टारों के साथ काम किया । तमिल फिल्म ‘पट्टिकाडा पट्टनामा’ के लिए जयललिता को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला । यह एम जी रामचंद्रन ही थे जिनके साथ जयललिता ने पहले सिनेमा में सफलता की बुलंदियों को छुआ तथा फिर राजनीति की तरफ कदम बढ़ाया ।

अभिनेत्री जयललिता से अम्मा तक
एम जी रामचंद्रन के कहने पर जयललिता ने 1982 में अन्ना द्रमुक की सदस्यता ग्रहण कर ली। जयललिता इन सब से भले ही खुश नहीं थीं लेकिन शोहरत भला किसे रास नहीं आती । 1983 में पहले वह चुनाव प्रचार प्रमुख बनीं तथा इसी साल तिरुचेंदूर से चुनाव जीत कर पहली बार विधायक भी चुनी गयीं । जनता जयललिता को पसंद कर रही थी और जयललिता एक एक कर के राजनीति में भी सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थीं। अभी तक जयललिता की ज़िंदगी एमजीआर के मुताबिक ही चल रही थी लेकिन फिर 1988 में कुछ ऐसा हुआ जिससे जयललिता की ज़िंदगी का हर फैसला उनका खुद का हो गया । ये वही समय था जब एमजीआर ने इस दुनिया को अलविदा कहा ।

राजनीति में अच्छा खासा समय देने के बाद अब जयललिता ना तो पीछे नहीं हट सकती थीं और ना ही उन्हें अब किसी के अधीन रहना मंज़ूर था । परिणामस्वरूप अन्ना द्रमुक पार्टी दो हिस्सों में बंट गयी । एक हिस्से आया एमजीआर की पत्नी जानकी के पक्ष में तो दूसरे पर जयललिता का अधिकार हो गया । समीकरण कह रहे थे कि जयललिता ही एमजीआर की राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं लेकिन वक्त अभी जयललिता को और तपाना चाहता था । चुनाव से पहले ही जयललिता की पार्टी के 6 सदस्यों को अयोग्य क़रार दे दिया । नतीजा ये निकला कि एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन चुनाव जीत गयीं तथा तमिलनाडु की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं ।
राष्ट्रपति शासन के बाद 27 सीटें जीत कर 1989 में जयललिता विपक्ष का चेहरा बनीं। जनता जयललिता को पसंद तो कर रही थी लेकिन कुछ कमी थी जिसके कारण उन्हें वो समर्थन नहीं मिल रहा था जिसकी उन्हें चाहत थी । लग रहा था जैसे किसी बड़े मौके की ज़रूरत है । जयललिता की पार्टी को ये मौका मिला 25 मार्च 1989 के दिन । यही वो दिन था जब तमिलनाडु की विधानसभा में सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों आपस में भिड़ गये । डीएमके और अन्ना द्रमुक के सदस्यों के बीच हुई हाथापाई में जयललिता के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती की गयी । सत्ता पक्ष की ये शर्मनाक हरकत जयललिता के लिए एक मौका साबित हुई।
फटी हुई साड़ी में जयललिता विधानसभा से बाहर आईं और ये प्रतिज्ञा कर ली कि जब तक वह मुख्यमंत्री नहीं बन जातीं तब तक सदन में नहीं लौटेंगी । औरत की प्रतिज्ञा सनातन से कहर ढाती आ रही है। जयललिता की प्रतिज्ञा ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया । उन्हें जनता की पूरी सहानुभूति मिली और सत्ता पक्ष को गुस्सा झेलना पड़ा । 90 का दशक कई घटनाओं के लिए जाना गया । इन्हीं में एक बड़ी घटना थी राजीव गांधी की हत्या । इस हत्या के बाद चुनाव हुए जिसमें जयललिता ने कांग्रेस से समझौता कर लिया तथा 234 में से 225 सीटें जीत लीं । इसके साथ ही उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली तथा तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गयीं। इस जीत के बाद जयललिता अपने चाहने वालों के लिए ‘अम्मा’ और ‘पुरातची थलाइवी’ यानी ‘क्रांतिकारी नेता’ बन गयीं ।
क्यों हुईं इतनी लोकप्रीय ?
हालांकि अम्मा पुकारी जाने वाली जयललिता पर एक से बढ़ कर एक घोटालों के आरोप लगे भी और साबित भी हुए लेकिन इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता में कभी कमी नहीं आई । इसका सबसे बड़ा कारण ये था कि उन्होंने कभी बांटने में कमी नहीं की। दोनों हाथों से अपने प्रशंसकों खास कर महिलाओं के बीच अपना स्नेह लुटाया । उन्होंने महिलाओं को मुफ़्त ग्राइंडर, मुफ़्त मिक्सी, बीस किलो चावल आदि बांटने में खूब दरियादिली दिखाई । अम्मा के इस कदम ने महिलाओं के जीवन स्तर को उठाने में बहुत मदद की और इधर उनकी पकड़ जनता पर और मजबूत होती गयी । गरीब असहाय लोग जयललिता को सच में अम्मा मानने लगे । उनका रुतबा इतना बढ़ गया कि बड़े बड़े लोग उनके सामने खड़े होने से कांप जाते थे । अम्मा भी जल्दी किसी से मिलना पसंद नहीं करती थीं।

क्यों नहीं की शादी ?
आम तौर पर किसी कारण से लोग आजीवन कुंवारे रह जाते हैं लेकिन जयललिता की शादी ना होने के पीछे कोई खास वजह नहीं थी । उन्होंने एक चैट शो में ये बताया था कि जब वह युवा थीं तब वह भी शादी के सपने देखती थीं। वह भी चाहती थीं कि उनकी हैप्पी फैमिली हो लेकिन ऐसा हो नहीं सका । उनका कहना था कि दरअसल उन्हें परफेक्ट आदमी ही नहीं मिला । एक उम्र बीतने के बाद वह राजनीति में इतनी व्यस्त हो गयीं कि कभी इसका ख़याल ही नहीं आया । लेकिन उन्हें शादी ना करने का कभी अफ़सोस भी नहीं रहा।

हां लेकिन दो लोग ऐसे थे जिन पर जयलिलता को क्रश था । पहले थे भारतीय क्रिकेटर नरी कॉन्ट्रैक्टर तथा दूसरे थे शमि कपूर । जयललिता ने बताया था कि वह सिर्फ नरी को देखने के लिए टेस्ट मैच देखने जाती थीं । वहीं जयललिता का जादू सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू पर भी खूब चला था । काटजू ने एक फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा था कि जवानी के दिनों में उनका दिल तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के लिए धड़कता था । तब जयललिता तमिल फ़िल्मों की मशहूर अभिनेत्री हुआ करती थीं । हालांकि काटजू ने कभी जयललिता से इस बात का जिक्र नहीं किया !
भारत या इसके पड़ोसी मुल्क की कई महिलाओं ने राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल किया है लेकिन इन सब में जयललिता का रास्ता सबसे कठिन था । बीबीसी लंदन के लिए दिए गये अपने इंटरव्यू में जयललिता ने करण थापर के सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि उनके पास वैसा बैकग्राउंड नहीं था, जैसा एशिया राजनीति की दूसरी महिलाओं के पास रहा है । इंदिरा गांधी का जन्म नेहरू परिवार में हुआ था । श्रीमति सिरिमाओ बंडारनायके, पीएम रहे बंडारनायके की पत्नी थीं । बेनज़ीर भुट्टो, जुल्फ़िकार अली भुट्टो की बेटी थीं । ख़ालिदा ज़िया, ज़ियाउर रहमान की पत्नी थीं । शेख हसीना मुजीबुर रहमान की बेटी थीं, लेकिन जयललिता के पास वैसी कोई पृष्ठभूमि नहीं, वह एक सेल्फ़मेड वूमन हैं ।
जयललिता के नाम के बारे में लोग जितना जानते हैं उनके जीवन से उतने ही अनजान हैं। ऐसे में अम्मा के जीवन पर फिल्म करना कंगणा रनौत के लिए एक बड़ी चुनौती है । यह समय ही बताएगा कि कंगणा अम्मा को खुद में किस हद तक ढाल पाती हैं ।