राजधानी स्थित लाल किले पर कब्जे की मांग करने पहुंची महिला की याचिका सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दी कि 150 साल से कहां थीं। कोर्ट ने महिला से पूछा इतने सालों से आप क्या कर रहे थे? बता दें, हिंदुस्तान के अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर II की पौत्रवधु ने हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय में लाल किले पर कब्जे को लेकर याचिका दायर की थी। इस महिला ने मांग की थी कि भारत सरकार लाल किले का कब्जा उसे सौंप दे, हालांकि ऐसा हुआ नहीं। याचिकाकर्ता का नाम सुल्ताना बेगम है। ये जफर के पर पोते मिर्जा बेदार वक्त की पत्नी हैं। इनके पति की मौत साल 1980 में हुई थी। तब से लेकर अब तक ये कोलकाता में ही रहती हैं।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने छीन लिया था ‘लाल किला’- याचिकाकर्ता
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक मोरे के माध्यम से दायर की गई याचिका में सुल्ताना बेगम ने दावा किया कि वे बहादुर शाह जफर II के परपोते की विधवा है। इस वजह से मुगल शासकों की संपत्ति की वे कानूनी रुप से उत्तराधिकारी हैं, इसलिए उन्हें लाल किले पर कब्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1857 में स्वतंत्रता के पहले युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उनके परिवार को उनकी संपत्ति से वंचित कर दिया गया था, जिसके बाद बहादुर शाह जफर को देश से निर्वासित कर दिया गया था और लाल किले का कब्जा मुगलों से छीन लिया गया।

150 वर्षों तक कहां थीं?
उनके इस दावे पर न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकीले से सवाल किया कि अदालत का दरवाजा खटखटाने में परिवार को 150 साल से अधिक की देरी क्यों हुई? न्यायमूर्ति पल्ली ने मजाकिया अंदाज़ में कहा, “मेरा इतिहास बहुत कमजोर है, लेकिन आप दावा करते हैं कि 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा आपके साथ अन्याय किया गया था तो 150 वर्षों से अधिक की देरी क्यों है? इतने सालों से आप क्या कर रहे थे?”
अनपढ़ हैं सुल्ताना बेगम
इसके अलावा इस मामले पर सुनवाई कर रही पीठ ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि “आपने कोई विरासत चार्ट दाखिल नहीं किया है। हर कोई जानता है कि बहादुर शाह जफर को अंग्रेजों ने निर्वासित कर दिया था, लेकिन अगर उनके वारिसों ने कोई याचिका दायर नहीं की तो क्या वह ऐसा कर सकती हैं? इसपर याचिकाकर्ता के वकील मोरे ने कहा कि पढ़ी-लिखी ना होने की वजह से इतनी देरी हुई। हालांकि कोर्ट ने उनकी इस तर्क को सिरे से नकारते हुए कहा कि “समय पर कदम क्यों नहीं उठाए गए, इसलिए अब इसका कोई औचित्य नहीं है।”
ममता बनर्जी से कर चुकी हैं मुलाकात
अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर II की पुत्र वधू सुल्ताना कोलकाता में ही रहती हैं। उनका निकाह जफर के पोते मिर्जा बेदार से हुआ था। साल 1980 में उनके पति की मौत के बाद उनकी आर्थिक स्थिति काफी तंग हो गई। आलय यह है कि उनके पास रहने को घर तक नहीं है।
बता दें, साल 2004 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बहादुर शाह जफर के वंशजों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने इन्हें 50 हजार रुपये का चेक और एक फ्लेट देकर आर्थिक सहायता की थी। इसके अलावा दीदी ने सुल्ताना बेगम की पोती रोशन आरा की रेलवे में नौकरी भी लगवाई थी।
पहले भी उठ चुकी है ‘लाल किले’ पर कब्जे की मांग
गौरतलब है, सुल्ताना बेगम से पहले बहादुर शाह जफर की परपोती रौनक जमानी बेगम और उनकी बहन जीनत महल ने वर्ष 2007 में लाल किले पर कब्जे का दावा किया था। उन्होंने दावा किया था कि वे मुगलों की इतनी सारी संपत्तियों में से सिर्फ एक चीज़ मांग रही हैं।