Friday, April 17, 2026

जब दिलीप कुमार की इस एक्ट्रेस ने ठुकरा दिया था ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’, हैरान रह गई थी इंडस्ट्री

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार भले ही आज हम सबके बीच नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्में एक्टर की कमी को पूरा करती हैं। आज भी उनकी फिल्में दर्शकों का उतना ही मनोरंजन करती हैं जितना कि पहले किया करती थीं। दिलीप कुमार ने अपने दौर की टॉप एक्ट्रेसेस के साथ काम किया। उन्होंने इन सभी के साथ मिलकर हिंदी सिनेमा को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

बात करें दिलीप कुमार की सुपरहिट फिल्मों की तो इनमें साल 1955 में रिलीज़ हुई फिल्म देवदास दर्शकों की फेवरेट फिल्मों में से एक है। इस फिल्म ने दिलीप कुमार को ट्रजिडी किंग का दर्जा दिलाया था। इस मूवी में फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अदाकारा सुचित्रा सेन ने अहम किरदार निभाया था। उन्होंने इस फिल्म में पारो का रोल निभाकर सभी को हैरान कर दिया था।

suchitra sen

हिंदी सिनेमा में सुचित्रा का डेब्यू

य़ही वो फिल्म थी जिससे सुचित्रा सेन ने हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया था। इससे पहले एक्ट्रेस ने बंगाली भाषा की कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं। उनका नाम बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेसेस में शुमार था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुचित्रा सेन का जन्म आज ही के दिन साल 1931 को बांग्लादेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। यही वजह थी कि उनकी शादी महज़ 15 साल की उम्र में एक रईस व्यापारी के बेटे से छोटी सी आयु में कर दी गई थी। हालांकि, उनका यह रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं चला और उनकी शादी टूट गई थी।

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बचपन से था एक्टिंग का शौक

बताया जाता है कि सुचित्रा को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था। वे स्कूल में होने वाले नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मों की तरफ रुख किया। कहा जाता है कि बंगाली फिल्मों में उनकी सबसे पहली फिल्म थी ‘शेष कोथाय’। इस फिल्म से ही सुचित्रा ने अपने फिल्मी करियर का आगाज़ किया था। हालांकि, उनकी यह फिल्म किसी कारण से सिनेमाघरों में रिलीज़ नहीं हो सकी थी। लेकिन एक्ट्रेस ने हार नहीं मानी और वे डटी रहीं।

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ठुकरा दिया था फिल्म जगत का उत्कृष्ट सम्मान

बाद में उन्होंने अपनी अदाकारी से बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में खूब नाम कमाया था। इसके बाद एक्ट्रेस ने हिंदी सिनेमा की ओर रुख किया और उनकी पहली ही फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। दिलीप कुमार के साथ देवदास में सुचित्रा ने अपनी एक्टिंग का वो मंज़र दर्शकों को दिखाया था जिसका हर कोई मुरीद हो गया था। इस फिल्म के लिए एक्ट्रेस को फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा हिंदी सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें फिल्म जगत के सबसे उत्कृष्ट सम्मान दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। हालांकि, एक्ट्रेस ने इस अवॉर्ड को लेने से इनकार कर दिया था।

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फिल्म के फ्लॉप होने से दुखी हो गईं थी एक्ट्रेस

इसकी वजह यह थी कि अपने ज़माने की इस टॉप अभिनेत्री उस मुकाम को हांसिल किया था जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं। उनकी ज्यादातर फिल्में हिट हुई थीं। लेकिन एक फिल्म ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया था जिसकी वजह से उन्होंने फिल्मी दुनिया से दूरी बनाने का कठोर फैसला कर लिया था। यह फिल्म थी ‘प्रोनॉय पाशा’। इस फिल्म में एक्ट्रेस ने जीतोड़ मेहनत की थी लेकिन यह फिल्म पर्दे पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी जिसकी वजह से वे अंदर से टूट गई थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फिल्म के बाद उन्होंने लाइमलाइट से दूर रहने का फैसला कर लिया था। इसलिए एक्ट्रेस ने दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड लेने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है, दिल का दौरा पड़ने से सुचित्रा सेन का निधन 82 साल की उम्र में मुंबई में ही हुआ था। उन्होंने अपनी मौत से पहले 35 साल गुमनामी में गुज़ारे थे।

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