Sunday, May 10, 2026

नासिक की इस वकील ने देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों से बनाए खिलौने, बांट रही बच्चों में खुशी

अक्सर आपने अपने आसपास क्षेत्र में देखा होगा कि लोग देवी-देवताओं की मूर्तियों को किसी खुली जगह पर छोड़कर चले जाते हैं। कई बार मूर्तियों के खंडित होने पर लोग उन्हें किसी पार्क, मंदिर या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर रख देते हैं।

लोगों के ऐसा करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, घरों में खंडित ईश्वर की खंडित मूर्ति को नहीं रखा जाता है। शायद इसकी वजह से लोग इन मूर्तियों को सड़क किनारे छोड़कर चल देते हैं। हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इनका विसर्जन नहीं कर पाते हैं वे भी किसी बाउंड्री वॉल पर मूर्तियों को रख देते हैं।

प्रकृति को हो रही हानि

बता दें, प्लास्टर ऑफ पैरिस यानी पीओपी से बनाई जाने वाली ये मूर्तियां पानी में घुल भी नहीं पाती हैं जिसकी वजह से ये प्रकृति को नुकसान पहुंचाती हैं।

पहले के ज़माने में मूर्तियां सिर्फ मिट्टी से बनाई जाती थीं, जिन्हें नदियों और तालाबों में आसानी से विसर्जित कर दिया जाता है। हालांकि, अब मूर्तियों को बनाने के लिए तमाम तरह के केमिकल्स, कलर्स और पीओपी का इस्तेमाल किया जाता है जो कि पर्यावरण के लिए एक घातक समस्या बनता जा रहा है।

महिला ने की पहल

ऐसे में इस समस्या से जूझने के लिए नासिक की एक महिला ने पहल की है। उन्होंने इन मूर्तियों को रिसाइकिल करके इनसे बच्चों के लिए खिलौने आदि बनाने की शुरुआत की है।

मालूम हो, नासिक की तृप्ति गायकवाड़ पेशे से वकील होने के साथ-साथ संपूर्णम सेवा फाउंडेशन की संस्थापक भी हैं। इस संस्था के तहत वे पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने का भी प्रयास कर रही हैं।

फोटो फ्रेम से की शुरुआत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तृप्ति का घर गोदावरी नदी के तट पर बना हुआ है। एक बार उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति लकड़ी के फोटो फ्रेम को नदी में फेंक रहा था। उन्होंने उस व्यक्ति को ऐसा करने से मना किया और उससे वह फोटो फ्रेम ले लिया।

इस घटना के बाद तृप्ति को आइडिया आया कि क्यों ना वे इन फोटो फ्रेम्स और मूर्तियों को रिसाइकिल करके बच्चों के लिए खिलौने और जानवरों के लिए बाउल बनाएं।

संपूर्णम सेवा संस्थान की स्थापना की

उन्होंने अपने इस आइडिया पर काम करने की शुरुआत के लिए कुछ पैसे अपने पिता से लोन के तौर पर लिए और संपूर्णम सेवा फाउंडेशन की स्थापना की। इसके बाद तृप्ति ने सोशल मीडिया के जरिये लोगों से खंडित मूर्तियां, लकड़ी के फोटो फ्रेम आदि मांगे। जिसपर उन्हें की जगहों से लोगों ने कॉन्टेक्ट किया।

उन्होंने इन सभी को रिसाइकिल करके तमाम तरह के यूजफुल प्रोडक्ट्स बनाकर मुंबई के कई इलाकों में बांटे। आज मुंबई के कोने-कोने से लोग तृप्ति से कॉन्टेक्ट करते हैं। इसके बदले में उन्हें बस 50 रुपये रिसाइकिल का चार्ज देना पड़ता है।

धार्मिक भावनाओं का रखा जाता है ख्याल

गौरतलब है, अपनी संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों का जिक्र करते हुए तृप्ति ने बताया कि रिसाइकलिंग के दौरान इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावना आहत ना हो।

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