राजस्थान की राजनीति में लगातार चल रहे सियासी उठापटक में सचिन पायलट के पिता और भूतपूर्व गृहराज्यमंत्री रह चुके स्व राजेश पायलट एक बार फिर चर्चा में है । सचिन पायलट के समर्थक और वरिष्ठ नेता उन्हें याद कर रहे है ।
सचिन पायलट के पिता श्री राजेश पायलट सेना में पायलट रह चुके थे | सेना में पायलट रहते हुए राजेश पायलट ने 1971 का युद्ध लड़ा था और अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन को धूल चटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। स्व राजेश पायलट को युद्ध में बहादुरी के लिए सेना में पदक भी मिला ।

शिक्षा के लिए संघर्ष
बेहद गरीब किसान परिवार से आने वाले राजेश पायलट ने बचपन में दूध बेचकर पढ़ाई पूरी की थी और सेना में भरती होकर पायलट बने थे । बाद में लुटियंस जोन के जिन बंगलो में राजेश पायलट दूध बेचते थे वहीँ राजनीती में आने के बाद राजेश पायलट सांसद बनकर पहुंचे ।
राजेश पायलट मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला गौतमबुद्धनगर के वैदपुरा गाँव के रहने वाले थे | बचपन में 11 वर्ष की उम्र में पिता की मृत्यू होने पर राजेश पायलट के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गयी थी | कम उम्र में नंगे पैरो कई किलोमीटर पैदल चलकर उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी की थी । कुछ सालो बाद चचेरे भाई की दूध की डेरी पर सहयोग करने के लिए गाँव छोडकर दिल्ली आ गये और लुटियंस जोन में दूध बेचने का काम करने लगे ।
एयरफोर्स में राजेश पायलट
दूध का काम करते हुए ही उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और वायु सेना में भर्ती हो गये। प्रशिक्षण के बाद लड़ाकू विमान के पायलट बने । उसके बाद 15 वर्षो की मेहनत के बाद प्रमोशन पाकर स्क्वार्डन लीडर बने | 1971 के युद्ध में इन्होने हिस्सा लिया और बहादुरी दिखाई । सेना में बहादुरी के लिए इन्हें पदक मिला और देश भर में चर्चा में आये ।

राजनीति में राजेश पायलट
सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट 1971 में नौकरी छोड़कर राजनीति में आये और भरतपुर से कांग्रेस में टिकट पर चुनाव लड़े | टिकट के लिए नाम भरते वक्त वहां के कार्यकर्ताओ के आग्रह पर राजेश्वर प्रसाद बिधूड़ी से नाम बदलकर राजेश पायलट के नाम से परचा भरा ।
उन्होंने भरतपुर की सीट से वहां के राजपरिवार की सदस्य महारानी को हराकर पहला चुनाव जीता । और इसी के साथ राजनीति की दुनिया में उन्होंने कदम रखा ! इसके बाद उन्होंने कई चुनाव जीते और 1991 से 1993 तक टेलिकॉम मिनिस्टर रहे ।

1993 से 1995 तक राजेश पायलट आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहे ।
उनका कहना था –
“जब किसानो और मजदूरों के बच्चे पढ़ लिख कर उन कुर्सियों तक पहुचेंगे जहाँ से नीतियाँ बनती और क्रियान्वित होती है तब भारत का सही मायनों में विकास होगा “- राजेश पायलट (Rajesh Pilot)
मजबूत छवि वाले थे सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट
राजनीति में राजेश पायलट की छवि एक मजबूत व्यक्ति की थी। जो अपने कठोर निर्णयों के लिए जाने जाते थे । आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने विवादास्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी को जैल भेजा था। जिसके लिए उन्होंने अपना मंत्रिपद भी दाव पर लगा दिया । चंद्रास्वामी तात्कालिक प्रधानमंत्री के गुरु माने जाते थे । और ऐसे में कोई भी उनपर हाथ डालने की नहीं सोच सकता था ।राजेश पायलट ने उसे भ्रष्टाचार में लिप्त देखकर कार्यवाही की और जेल भेज दिया ।
राजेश पायलट के ऊपर दवाब था कि चंद्रास्वामी को जेल भेजने पर उनके खिलाफ कार्यवाही हो सकती है । इस पर राजेश पायलट ने कठोर शब्दों में कहा था –
चाहे मुझे जेल जाना पड़े , पर ये खेल ख़त्म होगा
हालाकि इसका खमियाज उन्हें मंत्री पद खोकर चुकाना पड़ा । लेकिन उनकी छवि और मजबूत हो गयी । उन्हें उनके कठोर निर्णयों के लिये जाना जाने लगा ।

राजेश पायलट ने सीताराम केसरी के सामने पार्टी अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा लेकिन सफलता नही मिल पायी। बताया जाता है कि उन्होंने सोनिया गांधी के सामने भी चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की थी । जिसका उनके कई साथियों ने विरोध भी किया । लेकिन उन्होंने पीछे हटने से मना कर दिया |
दुखद दुर्घटना में गयी थी सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट की जान
राजेश पायलट को जीप चलाने का शौक था । काफी बार वो अपनी जीप खुद ही ड्राइव करते थे ।11 जून 2000 को अपने चुनावी क्षेत्र से आते हुए हाईवे पर उनकी जीप एक ट्रोला से भिड गयी जिसमे वो गंभीर रूप से घायल हो गये और उसी दिन सवाई मानसिंह अस्पताल में शाम ७ बजे जमीन से जुडे नेता का दुखद निधन हो गया । उनके निधन के बाद 24 वर्ष की उम्र में सचिन पायलट राजनीति में आ गये।
ये भी पढ़िए – जिन बंगलो में कभी बेचा दूध, वहीँ सांसद बनकर पहुंचे थे राजेश पायलट!